दर्द के वर्क पर गीत हमने लिखे
रोज़ ही हम उन्हें गुनगुनाते रहे
गाहे आबादियाँ गाहे बीरानियाँ
उनसे मिलने की यादें सजाते रहे
नाम लिख-लिख के उनका हर रोज ही
अपने दिल में उन्हें हम बसाते रहे
उनकी खुश्यिों की खातिर कहाँ से कहाँ
मंजिलों में भी महफिल सजाते रहे
चल दिये छोड़ कर साथ कुछ इस तरह
जिन्दगी भर हमें याद आते रहे
बन के ‘बदनाम’ ओढ़ी है रुसवाइयाँ
वो हमें हम उन्हें याद आते रहे।

दर्द के वर्क पर गीत हमने लिखे
जवाब देंहटाएंरोज़ ही हम उन्हें गुनगुनाते रहे
गाहे आबादियाँ गाहे बीरानियाँ
उनसे मिलने की यादें सजाते रहे
bhot sundar rachna....!!
nice
जवाब देंहटाएंap ne dard me bhi khushiya dund li hamne aj hi ap ka artical pada bahut hi achha likha hai ap ne.log gane ke ba sirf yade chhod jate hai
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