रविवार, 22 फ़रवरी 2009

मोहब्बत हो गयी (गुरू सहाय भटनागर ‘बदनाम’)

हमको जब तुमसे मोहब्बत हो गयी
जिन्दगी अपनी बहुत ही खूबसूरत हो गयी
उनसे मिलना, बातें करने में मजा आने लगा
हर घड़ी फिर देखने की तुमको चाहत हो गयी
जब तेरा रूखसार पर जुल्फें गिराना बार-बार
अब घटा बरसात की बरसेगी राह हो गयी
सुर्ख लव पर मुस्काराह, आंख में मयका नशा
बिन पिये ही आज अपनी कैसी हालत हो गयी
ये हंसी शाम कभी फिर नहीं आने वाली
तुम जो आओगें तो समझेगें महोब्बत हो गयी
तेरी इन शोख अदाओं पे ‘बदनाम’ दिल लुटा बैठे
बिन तेरे अब जिन्दगी जीना मुश्बित हो गयी।