गुलों को खिल खिलाना आ गया
हमें भी दिल लगाना आ गया है
हमें भी दिल लगाना आ गया है
बशर कोई न ये सब जान पाये
उन्हें छुपना छुपाना आ गया है
लगन चाहत की मन को भा गयी है
ग़जल अब गुन-गुनाना आ गया है
जो डर जाये मोहब्बत क्या करेगा
बहारो तुम पे मिटना आ गया है
चलो दिल देके तुम अब भूल बैठे
हमें ‘बदनाम’ बनना आ गया है।
